ग़ज़ल तस्वीर ।। Tasveer

मुहब्बत में मिला क्या दिल लगाकर,
बहुत पछता रहा हूँ चोट खाकर।

ये क्या बीमारियां पाली है तुमने,
किसी की याद को दिल मे बसाकर।

बनाऊंगा मैं यादों का घरौंदा ,
तेरी तस्वीर कमरे में लगाकर।

समझ मे आगई मेरे भी दुनियाँ,
मुसलसल जखमें दिल अपनो से पाकर।

तड़प आँसू उदासी बेकरारी,
यही पाया है मेने दिल लगा कर।

मुझे कैसे भुलायेगा ये ज़माना,
मैं रहता हूँ दिलो में घर बनाकर।

वाज़िद उस शख़्स से रिश्ता न रखना,
गुज़र जाता है जो नज़रे बचाकर।

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