Gazal Judai जुदाई

ग़ज़ल

जुदाई का मैं दुख तो सह गया हूँ,
मगर यकसर बिखर कर रह गया हूँ।

कभी पलकों पे थी तेरी सूरत,
मगर अब अश्क़ बनकर बह गया हूँ।

बड़े हैं इतने अंदेशों के साए,
मैं अपनो में सिमट कर रह गया हूँ।

कयामत से वो हरगिज़ कम नहीं थे,
जो सदमें हँसते - हँसते सह गया हूँ।

आलम, दुख, दर्द, आँसू और आहें,
कई सोचो में ढल कर रह गया हूँ।

इसे ऐ काश वो भी जान जाए,
नज़र से बात दिल की कह गया हूँ।

ये दिल दरिया है ' वाज़िद ' कितना गहरा,
जो उतरा हूँ तो तह - दर - तह गया हूँ।।

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Wazid Tiger Sizohan

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