Shayari शायरी
रुसवाइयों से खुद को बचाने में रह गया,
मैं आपके खतों को छुपाने में रह गया।
आना था मेरे पास वो ये भूल भी गया,
मैं था कि अपना घर सजाने में रह गया।
मैं टूट कर बिखर तो गया बात है अलग,
रिश्तों को टूटने से बचाने में रह गया।
मुझ को उदास देख के वो ग़म ज़दा न हो,
यूं अपने दिल का दर्द छुपाने में रह गया।
'वाज़िद' मेरी खुशियां ज़माने ने छीन ली,
मुस्कान मैं सब के लब पे सजाने में रह गया।
दर्द-ऐ-अल्फ़ाज़ राइट्स
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