तेरे चेहरे पे ग़ज़ल Ghazal

तेरे चेहरे पे जब नज़र ठहरे,
दिल ये कहता है उम्र भर ठहरे।

जब मैं ग़म से निढ़ाल हो जाऊं,
तेरे शाने पे मेरा सर ठहरे।

कम से कम तुम संभालते दुनियाँ,
हम तो खुद से भी बेख़बर ठहरे।

कुछ न कुछ तो है इसके पर्दे में,
क्यूँ ज़बां तेरे नाम पे ठहरे।

तज़रिबा तुमको भी है कम इसका,
इश्क़ में हम भी बेहुनर ठहरे।

सामने मेरे जब भी है वो 'वाज़िद',
ये नज़र कैसे चाँद पर ठहरे।।

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